संस्कृति भाषा हमारी मां के समान हैं और मां की सेवा करना हमारा कर्तव्य है इसलिए संस्कृति भाषा को बचाने के लिए में अपना पुरा जीवन देने के लिए निकल पड़ी हूं :- आयुषी अन्या संस्कृत गायिका देवघर

देवघर देवों के देव महादेव की नगरी है और यहां विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ विराजमान हैं बैद्यनाथ की नगरी में संस्कृति भाषा का बड़ा ही महत्व है क्योंकि सनातन धर्म में पूजा पाठ में जो मंत्र और वेद पढ़े जाते हैं उसे संस्कृति भाषा में ही पढ़ा जाता है और संस्कृति को सभी भाषाओं की जननी भी कहा जाता है लेकिन वर्तमान समय में संस्कृति के साथ साथ लोग हिंदी को भी भूल रहे हैं और अंग्रेजी भाषा के साथ अंग्रेजी कल्चर को भी अपना रहे हैं 
ऐसे विकट परिस्थिति में देवघर की बेटी आयुषी अन्या सभी भाषाओं की जननी कहे जाने वाले संस्कृति भाषा को बचाने और अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है आयुषी अन्या देवघर बाबा बैद्यनाथ मंदिर के तीर्थ पुरोहित समाज की बेटी हैं और आयुषी का कहना है कि हमें बचपन से ही संस्कृति से रुचि है क्योंकि हम तीर्थ पुरोहित समाज से आते हैं और हमारे घरों में पूजा अर्चना होती थी तो संस्कृत में ही किया जाता था लेकिन देख रहे हैं धीरे धीरे लोग इससे दूर हो रहे हैं इसलिए मैने संस्कृति को बढ़ावा देने और अपनी संस्कृती को बचाने के लिए संस्कृति भाषा में गाना गाने लगा और फिर धीरे धीरे संस्कृत के प्रति मेरी रुचि और भी ज्यादा बढ़ी जिसके बाद मैने देवघर के एक निजी स्कूल से मेट्रिक करने के बाद संस्कृत भाषा से इंटर करने के लिए राष्ट्रीय संस्कृत विद्यालय तिरुपति गई और वहां से प्रक्षात्री किया उसके बाद संस्कृत में ही आगे पढ़ाई करने के लिए फिर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से शास्त्री करने के लिए में नामांकन कराई हूं 
और मेरा एक ही लक्ष्य है की सब भाषाओं की मां संस्कृत को कैसे बचाया जाए उसके लिए हम काम कर रहे हैं आयुषी को संस्कृत में गाना गाने संस्कृत में भाषण देने और राष्ट्रगान गाने के लिए बहुत से अवार्ड भी मिला है आयुषी की रुचि संस्कृत के प्रति तब ज्यादा बड़ गया जब आयुषी 9 वी कक्षा में पढ़ती थी तभी स्कूल की और से एक संस्कृत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जिसमें बहुत से बच्चियों ने भाग लिया था 
और आयुषी भी उस प्रतियोगिता में भाग लिया था आयुषी बताती है कि जब में वहां पहुंचा तो देखा की वहां शिक्षक थे वो संस्कृत में गाना गा रहे थे संस्कृत गाना पर डांस कर रहे थे और ये सब देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा और मेने भी संस्कृत में गाना गाने का प्रयास शुरु किया और बहुत से गाना को गाया लोगो को पसंद आया और बहुत से अवार्ड भी मुझे मिला और अब में अपनी संस्कृति मां को बचाने के लिए मिशन पर निकल पड़ी हूं |

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